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कवर्धा पंडरिया :घर वापसी के 700 दावों पर उठे सवाल, समाज प्रतिनिधियों एवं जागरूक क्षेत्रवासियों ने मांगी ग्रामवार और नामवार सूची।

कवर्धा पंडरिया :घर वापसी के 700+ दावों पर उठे सवाल, समाज प्रतिनिधियों एवं जागरूक क्षेत्रवासियों ने मांगी ग्रामवार और नामवार सूची

कवर्धा/पंडरिया। पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में आयोजित तथाकथित “घर वापसी” कार्यक्रमों को लेकर समाज प्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं जागरूक नागरिकों द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता में कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए गए। प्रेस वार्ता में उपस्थित वक्ताओं ने मांग की कि विधायक द्वारा सार्वजनिक रूप से किए गए 700 से अधिक लोगों की घर वापसी के दावे की सत्यता प्रमाणित करने हेतु ग्रामवार एवं नामवार सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि वनांचल क्षेत्र और आम जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

वक्ताओं ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी कारणवश अपने मूल धर्म एवं परंपरा से दूर चला गया हो और पुनः अपनी आस्था में लौटता है, तो वह स्वागत योग्य विषय है, चाहे संख्या एक हो या अधिक। किंतु जब सार्वजनिक मंचों, समाचार माध्यमों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से 700 से अधिक लोगों की घर वापसी जैसे बड़े दावे किए जाते हैं, तब यह जानना समाज और क्षेत्र की जनता का अधिकार है कि वे लोग कौन हैं, किस गांव से हैं और किन आधारों पर उन्हें इस आंकड़े में शामिल किया गया है।

प्रेस वार्ता में ग्राम पंचायत बूचीपारा के पंच, उपसरपंच, जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीणों ने उपस्थित होकर कहा कि उनके क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों को लेकर जो आंकड़े प्रचारित किए गए हैं, वे स्थानीय स्तर पर दिखाई देने वाली वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। उनका कहना था कि इस संबंध में निष्पक्ष सत्यापन आवश्यक है।

वक्ताओं ने कहा कि कूल्हीडोंगरी, नागाडबरा एवं बूचीपारा सहित आसपास के क्षेत्रों में आदिवासी समाज के लोग पीढ़ियों से अपनी पारंपरिक आस्था, रीति-रिवाज एवं सामाजिक परंपराओं का पालन करते आ रहे हैं। उनके अनुसार इन गांवों में बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन अथवा उसके बाद घर वापसी जैसी स्थिति के दावों की स्वतंत्र जांच की जानी चाहिए।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि बूचीपारा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के संबंध में बूचीपारा, कूल्हीडोंगरी, पिपरहा, जामुनपानी, नागाडबरा एवं छिरहा सहित विभिन्न गांवों के लगभग 200 परिवारों की घर वापसी का दावा सार्वजनिक रूप से किया गया था। उपस्थित ग्रामीणों एवं समाज प्रतिनिधियों ने इन आंकड़ों के संबंध में तथ्यात्मक सत्यापन और पारदर्शिता की मांग की।

वक्ताओं ने कहा कि विधायक द्वारा किए गए 700 से अधिक लोगों की घर वापसी के दावे के बाद विभिन्न गांवों का भ्रमण कर स्थानीय लोगों से जानकारी प्राप्त की गई। इस दौरान प्राप्त तथ्यों के आधार पर उन्होंने स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की आवश्यकता व्यक्त की।

प्रेस वार्ता में यह भी उल्लेख किया गया कि नारायण सिंह धुर्वे ने बताया कि वे पूर्व में सामाजिक स्तर पर अपनी पारंपरिक आस्था एवं समाज से पुनः जुड़ चुके थे, इसके बावजूद उन्हें पुनः एक कार्यक्रम में घर वापसी के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस संबंध में भी स्पष्टता की मांग की गई कि ऐसे व्यक्तियों को किस आधार पर आंकड़ों में शामिल किया गया।
इसी प्रकार जामुनपानी के ग्राम पटेल रमेश कुमार धुर्वे ने कहा कि नागाडबरा क्षेत्र में अन्य धर्म से जुड़े परिवारों की संख्या सीमित रही है तथा अधिकांश लोग पारंपरिक आदिवासी-सनातन आस्था से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक रूप से बताए जा रहे आंकड़ों की वास्तविकता का सत्यापन किया जाना चाहिए।

प्रेस वार्ता में कूल्हीडोंगरी के पूर्व सरपंच एवं आदिवासी समाज प्रतिनिधि कृष्णा परस्ते ने भी अपने विचार रखते हुए कहा कि उनके संबंध में लगाए गए कुछ आरोप तथ्यहीन हैं तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई और वस्तुनिष्ठ जांच की मांग की।

वक्ताओं ने प्रशासन एवं पुलिस से आग्रह किया कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए। उनका कहना था कि यह विषय केवल किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे वनांचल क्षेत्र की सामाजिक विश्वसनीयता, जनविश्वास और सार्वजनिक पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।
अंत में समाज प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की कि यदि 700 से अधिक लोगों की घर वापसी का दावा किया गया है, तो संबंधित व्यक्तियों एवं गांवों की सूची सार्वजनिक की जाए, ताकि समाज और आम जनता स्वयं तथ्यों का परीक्षण कर सके ! साथ ही प्रशासन से भी निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई।

उपस्थित समाज प्रतिनिधि,जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन एवं जागरूक क्षेत्रवासी आनंद सिंह अतुल बारगाह चंद्रभान कोशले
पंडरिया, जिला कबीरधाम (छत्तीसगढ़

VIKASH SONI

Founder & Editor

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